मंहगाई बढ़ती क्यों नहीं?

मैं चिंतित हूं, डरा हुआ हूं, घबराया हूं… आखिर ये मंहगाई बढ़ती क्यों नहीं… Bachchan Ji की Family बढ़ गई, Akshay की fees बढ़ गई, Rakhi Sawant की Size बढ़ गई… लेकिन मंहगाई है कि बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही है। क्या मंहगाई अब इतनी डरपोक हो गई, कि एक भारतबंद से बढ़ना छोड़ देगी? सरकार क्यों चुपचाप बैठी है। मंहगाई बढ़ाना तो हर सरकार का फ़र्ज होता है। मैं रोज़ इस Hope में Newspaper खोलता हूं, कि आज तो आलू कुछ आगे बढ़ेगा, कई दिनों से 20 रूपये में, पूरा एक किलो चला आता है मेरे झोले में…। सब्ज़ी मंहगी हो, तो ज़ायकेदार लगती है।

मंहगाई बढ़ने से ही, देश के आगे बढ़ने का एहसास होता है…और ये मंहगाई विरोधी लोग देश को इतना पीछे धकेल देना चाहते हैं, जब 5 रूपये में 3 किलो शक्कर आ जाती थी। ये नहीं चलेगा, मंहगाई को बढ़ना ही होगा। अरे वो Salary ही क्या, जो 5 तारीख तक खत्म न हो जाए…तभी तो इंसान अगली Salary के लिए जोश से काम करता है…जिसकी सारे खर्चे निकालने के बाद भी आधी Salary बची रहे…वो इंसान काम क्या करेगा? मंहगाई बढ़ती है, तब इंसान आमदनी बढ़ाने की सोचता है, और जब आमदनी बढ़ती है, तो Economy में सुधार अपने आप हो जाता है।

जब हम मंहगे आमों का Mango Shake पीते हैं…तो गर्मी में कितनी Extra ठंडक पहुंचती है…एक गिलास पीकर ही आत्मा तृप्त हो जाती है, वहीं गन्ने का भले 3 Glass Juice गटक लो, जी नहीं भरता… जो 5 रूपये में गिलास भर आ जाता हो, वो हमारा जी क्या भरेगा। सीधा सा हिसाब है, ठंडक आम में नहीं आम की मंहगाई में होती है…

सस्ते होने का एक खामियाजा हम भुगत रहे हैं… पहले STD और Phone मंहगे थे, तो हम सिर्फ काम की बातें करते थे, और Phone रख देते थे… आज देश का आधा समय तो Phone पर फालतू की बातें करने में निकल जाता है… अब 60 पैसे Per min में तो यही दुर्दशा होगी…

मंहगाई हमारे देश का गुण है, और हम अपना गुण नष्ट करने में लगे हैं। मैं तो चाह रहा हूं, हर चीज़ मंहगी हो जाए, यहां तक कि आलू भी…ताकि किसी को अगर आलू के चिप्स भी खिला दो, तो वो गुण गाता फिरे कि कितना अच्छा स्वागत किया। पैसे की कीमत भी तभी पता चलेगी, जब पैसा कम हो, और मंहगाई ज्यादा…। सारे रिश्ते नाते, मंहगाई पर ही टिके हैं… जिस दिन मंहगी साड़ी मिलती है, उस दिन बीवी भी Extra प्यार करती है…  मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि वो जल्द से जल्द मंहगाई बढ़ाए, देश बढ़ाए…

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