डंडे का झंडा

पिछले कुछ दिनों से न जाने क्यों अचानक देश महान सा लगने लगा है। सड़कों के गढ्ढे खूबसूरत लगने लगे हैं। Delhi में Common wealth game के Stadium की टपकती छत, हमें अपनी सी लगने लगी है…हमारे घर में भी छतें टपकती हैं, हम बालटी रखकर काम चला लेते हैं। न जाने क्यों पिछले कुछ दिनों से नेताओं के लिए मुंह से गालियां ही नहीं निकलतीं। यहां तक कि मायावती पर भी गर्व होने लगा है। और तो और Dr. Amedkar फिल्म भी 3 idiots से अच्छी लगने लगी है। पहले Love Sex Aur Dhokha फिल्म से पहले “जन गण मन” शुरू होना वैसा ही लगता था, जैसे Shakira के Concert की शुरूआत सरस्वती वंदना से हो रही हो…मगर अब film में राष्ट्रगान irritate नहीं करता। अचानक रूपये का Symbol मिलने पर, रूपया dollar लगने लगा था…

न जाने ऐसा क्यों हो रहा है, कि अब You tube पर Sherlyn Chopra के Sexy video देखने में गुदगुदी नहीं बल्कि ‘ए मेरे वतन के लागों’ पर ज्यादा जोश आ रहा है। तीन चार दिनों से किसानों की आत्महत्याओं की खबर पढ़कर अपने IPAD से चिड़ सी लगने लगी है। अब तक cola बिना खाना नहीं खाया जाता था, लेकिन दो तीन दिनों से ये Multinational Cola Companies हमें दुश्मन से लगने लगे हैं। अचानक याद आ गया कि तिरंगे में सबसे ऊपर कौन सा रंग होता है। अब तक हिंदी पर शरमाने के बाद, अचानक हिंदी हमें अपनी राष्ट्रभाषा नज़र आने लगी।  अब गांधी जी और Bipasha basu के Joke मारने वाले को मारने का मन करता है। अचानक Kargil के शहीदों की कहानियों के E mail forward करने का दौर चल पड़ा। NASA IBM और USA में कितने Indians काम करते हैं, इनके आंकड़े पढ़ने में गर्व होने लगा…

ये सब इतना uncomfortable सा हो रहा था, कि मुझे अपने आप की चिंता होने लगी, समझ में नहीं आया कि ये मेरे साथ क्या हो रहा है। कहीं मेरे दिमाग में Chemical लोचा तो नहीं हो रहा है ? सोचा कि आज के ज़माने में Risk लेना अच्छा नहीं है, क्यों न Doctor को दिखा दिया जाए। मैं जैसे ही घर से निकल कर चौराहे पर पहुंचा तो देखा, गांधी जी की मूर्ति को साफ किया जा रहा था, उन पर से कबूतरों के योगदान को मिटाया जा रहा था… झंडे के डंडे पर भी सफेद रंग पोता जा रहा था। अचानक मेरे दिमाग की बत्ती जली, कहीं 15 अगस्त तो नहीं आ रहा है…? Date देखी तो पता चला कि बस अगले हफ्ते ही 15 अगस्त है, इसीलिए ये बैचेनी है।

अचानक मैने Doctor के यहां जाना छोड़ दिया, क्योंकि मुझे मेरा मर्ज़ समझ आ गया था। दरअसल आज़ादी के मौसम की यही Problem है, इन दिनों थोड़े बचाव और देखभाल की ज़रूरत है…। इन दिनों देशभक्ति का फैलाव बहुत जल्दी से होता है…लेकिन चिंता की कोई बात नहीं, 15 अगस्त के एक दिन बाद ही देशभक्ति के Virus अपने आप मर जाते हैं, फिर तो तबियत इतनी हल्की हो जाती है, कि एक दिन पहले जो तिरंगा बड़ी शान से अपनी गाड़ी पर लगाए घूमते हैं, दूसरे दिन उसी को कुचल कर आगे बढ़ जाते हैं।

मेरे लिए देशभक्ति के Virus की रोकथाम बहुत ज़रूरी थी… मैं उल्टे पांव घर की और दौड़ा और Channel Change करके अंग्रेज़ो के हिंदुस्तानियों पर अत्याचार नहीं, बल्कि Rahul Mahajan द्वारा Dimpy की पिटाई के समाचार देखने लगा… बस मैं इंतज़ार कर रहा था, कि ये 15 अगस्त निकले और मैं Normal हो जाऊं…

© R D Tailang

Mumbai

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