सब लोग Suresh kalmadi के पीछे हाथ धो कर पड़ गए, कि Common Wealth games में खूब पैसा खाया गया… अरे भई एक तो नाम रखते हो, Common Wealth, यानि मिली जुली संपत्ति, और किसी ने मिल जुल के खा भी ली, तो दर्द हो रहा है। खाया किसी और ने, पेट में दर्द किसी और के हो रहा है।

यार दो चार हज़ार करोड़ रूपये खा भी लिए तो क्या फर्क पड़ता है… आप बोलेंगे कि वो हमारा पैसा है…जनता का पैसा है…तो भाई जनता का पैसा जनता के नेता ने खाया है, जो घूम फिर के जनता के पास ही तो आएगा…अरे जब vote खरीदने के लिए पैसा बटेगा तो कहां बटेगा जनता में..Simple..

दरअसल Media को, विरोधी दलों को इस बात का दर्द नहीं है कि देश का पैसा खाया, दर्द इस बात का है, कि देश का पैसा अकेले कैसे खाया, इन लोगों के बारे में ऐसा क्यों सोचा, कि ये लोग नहीं खाते… आखिरकार देश हमारी मां है, और मां का पैसा, एक बेटा अकेले डकार लेगा तो दूसरों को तकलीफ तो होगी ही…

मैं तो कहता हूं, कि अगर बीच बीच में बेचारे नेता कुछ हज़ार करोड़ पचा भी जाते है, तो उस पर इतना हंगामा क्यों… बताईए क्या फर्क पड़ता है… वो पैसा देश के खजाने में रहे, या नेता की तिजोरी में, Economy वही रहना है…सड़कों के गढ्ढे वही रहना है…मंहगाई वही रहना है, इसलिए तो किसी को खाने दो, भला उस पैसे का कुछ तो उपयोग हो…

अक्सर ऐसे उदाहरण मिलते हैं, कि फलां नेता इतना ईमानदार था, कि अपनी Salary भी Donate कर देता था, सरकारी सुविधाओं का उपयोग नहीं करता था… मैं पूछता हूं, कि उस नेता ने क्या उखाड़ लिया। उसके ज़माने में India कौन सा America हो गया…जब वो ईमानदार नेता कुर्सी पर था, हम तब भी नेताओं को गालियां देते थे, और अब खाऊ नेता बेटा हैं, तो हम गालियां देते हैं…नेता भ्रष्ट हो या ईमानदार, हमारी Life में कोई फर्क नहीं पड़ता… भ्रष्ट नेता शर्म के मारे, या डर के मारे, या लालच के मारे कुछ काम तो करता है…ईमानदार नेता अपनी अकड़ में खुद भी पैदल चलता है, और जनता को भी पैदल चलाता है। भ्रष्ट नेताओं ने खाकर ही सही, कुछ तो Stadium बनवा दिए, Common Wealth Games हो तो रहे हैं, अगर कोई ईमानदार नेता होता, तो कहता, क्या ज़रूरत है इन सब खेलों की… और सारा पैसा प्रधानमंत्री कोष में जमा करा देता।

देखा जाए तो भ्रष्टाचार, राजनीति का नैतिक गुण है…ईमानदारी से संतुष्टि आती है, और संतुष्टि से सुस्ती…संतुष्ट नेता सुस्त होता है। कभी आपको जोश चढ़ा कि आज प्रधानमंत्री लाल किले से क्या कहने वाले हैं, सुबह उठकर सुना जाए…नहीं, क्योंकि आपको पता है, वो संतुष्टि वाला भाषण देंगे, सुस्ती वाला… वो आतंकवादियों को भी ऐसे ललकारेंगे, जैसे बच्चे को पुचकार रहे हों…

इसलिए मेरा निवेदन है, कि देश को ईमानदार नेताओं की सुस्ती नहीं, भ्रष्ट नेताओं की चुस्ती को, जोश को अपना समर्थन दें… क्योंकि इसी भ्रष्टाचार के रहते हुए, हम विश्व में बड़ी ताकत बन चुके हैं… और भ्रष्टाचार का इसीतरह समर्थन रहा, तो आगे भी बहुत तरक्की करेंगे..।

भ्रष्टाचार, ज़िदाबाद..!!

© R D Tailang Mumbai

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