और एक दिन वही हुआ, जिसका मुझे डर था… अचानक अन्ना ने आंदोलन छेड़ दिया… कि अब इस देश में भ्रष्टाचार नहीं चलेगा… दिल पे गाज़ तो गिरनी ही थी… भ्रष्टाचार की जिस संस्कृति में हम पैदा हुए, पले, बढ़े, जवान हुए… उसके विकास में अपना भी योगदान दिया… अन्ना ने आकर अचानक उसे बुरा कह दिया और बोला कि आज से ऐसा करना खराब है… ये तो वही बात हो गई… कि जिस पत्नी के साथ इतने दिनों गुज़ारे हों… पड़ौसी आकर एक दिन बोल दे.. कि वो तो डायन है… मन कैसे मानेगा इस बात को… पर अन्ना कह रहे हैं, इसलिए मानना भी पड़ा, कि भ्रष्टाचार हमारे लिए वाकई बुरा है…

अन्ना से पहले हमें अपने भ्रष्टाचारी होने पर कितना गर्व था… हमारा आत्मविश्वास किस हद तक ऊंचा था, हम बिना Insurance की गाड़ी बेधड़क चलाते थे… क्योंकि हमें विश्वास था, कि अगर पकड़े जाएंगे, तो 50 रूपये से ज़्यादा नहीं लगेगा… देश का ऐसा कौन सा युवा है, जिसने बिना Driving License की गाड़ी नहीं चलाई हो… कभी पकड़े भी गए… तो 20 रूपये से ज़्यादा किसी हवलदार ने Demand नहीं की… आज स्थिति बिल्कुल बदल गई है, हर टोपी वाला हवलदार अन्ना नज़र आता है… गाड़ियां निकालने में डर लगता है… वो 50 रूपये वाला आत्मविश्वास खत्म हो गया है… पहले Road पे बिना Papers की गाड़ी भी जिस शान से लहराते हुए चलते थे… आज हाथ कांपने लगे हैं… ईमानदारी ने आत्मविश्वास पर ज़बरदस्त चोट की है… और देश के विकास के लिए, उसके नागरिकों का आत्मविश्वासी होना बहुत ज़रूरी होता है…

आज सारा देश कह रहा है, “मैं भी अन्ना…” जो खा रहा है वो भी अन्ना कहता है, और जो खिला रहा है वो भी अन्ना है… जब सारा देश अन्ना है, तो भ्रष्ट कौन है…? जब एक अन्ना दूसरे अन्ना को नहीं खिलाएगा, तो कौन खिलाएगा… ?

अन्ना की वजह से, हमारी तो सारी पढ़ाई ही बेकार हो गई… हिंदी के Papers में हमने ” जेब गरम करना” जैसे मुहावरों का अर्थ बता बता कर, कितने Marks हासिल किए थे… लेकिन भ्रष्टाचार खत्म होते ही, ये सारे मुहावरे भी निरर्थक हो जाएंगे… टेबिल के नीचे से लेना, ऊपरी कमाई, रंगे हाथों पकड़े जाना… जैसे सारे वाक्य अचारक खत्म हो जाएंगे, जो अभी तक हमारी पढ़ाई लिखाई का एक हिस्सा थे…

अन्ना को क्या है… अन्ना को Passport नहीं बनवाना… उन्हें राशन कार्ड भी नहीं चाहिए… वो गाड़ी भी Drive नहीं करना… बच्चों का Admission भी नहीं कराना… और तो और वो 15 -16 दिन भूखे भी रह सकते हैं… इसलिए वेा बिना भ्रष्टाचार के रह सकते हैं… वर्ना उनसे कहिए… Agent को बिना 2500 रूपये दिए Driving License बनवा लें तो मान लेंगे देश में ईमानदारी आ चुकी है… या फिर जिन्होंने रामलीला मैदान में किरण बेदी का अभिनय देखा है… वे अपने अपने शहर में जाकर, सारे Traffic नियम पाल रहे होंगे, या लौटते समय, चालू टिकट लेकर, Reservation डब्बे में न घुसे होंगे … तो समझेंगे अन्ना सफल हो गए हैं, और भ्रष्टाचार खत्म हो गया है…

पर मानना पड़ेगा अन्ना को… भ्रष्टचार भले खत्म हो या न हो… उन्होंने देश के उस युवा वर्ग को कमरे से बाहर ला दिया, जो दिन भर Face book के बैठा बैठा… या तो Photo upload करता रहता था, या Chat में लगा रहता था…  टोपी भले Fashion से ही सही, लेकिन Anna ने सबको टोपी पहना ही दी…

R D TAILANG

 

 

 

 

 

 

 

 

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